बीकेटीसी अध्यक्ष पर बरसे गणेश गोदियाल, बोले— बहस की चुनौती देकर पीछे हटना बताता है कि भाजपा के पास जवाब नहीं
देहरादून: बद्रीनाथ धाम में कथित चढ़ावा (दानराशि) चोरी मामले को लेकर सियासत लगातार तेज होती जा रही है। मामले में एक कर्मचारी की गिरफ्तारी के बाद अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी बढ़ गए हैं। इसी क्रम में उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष एवं बीकेटीसी के पूर्व अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने मंगलवार को उत्तरांचल प्रेस क्लब, देहरादून में प्रेस वार्ता कर वर्तमान बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी पर तीखा हमला बोला।
गणेश गोदियाल ने कहा कि बीकेटीसी अध्यक्ष ने उन्हें सार्वजनिक रूप से बहस की चुनौती दी थी। कांग्रेस ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए निर्धारित समय पर उत्तरांचल प्रेस क्लब पहुंचकर तथ्यों के साथ अपनी बात रखने की तैयारी की, लेकिन चुनौती देने वाले स्वयं उपस्थित नहीं हुए। उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि उनके पास अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस तथ्य नहीं हैं।
गोदियाल ने कहा कि जो व्यक्ति सार्वजनिक रूप से बहस की चुनौती देता है और फिर तय समय पर नहीं पहुंचता, वह अपनी विश्वसनीयता स्वयं खो देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और बीकेटीसी के पदाधिकारी जानबूझकर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं।
प्रमोद नौटियाल की नियुक्ति और नियमितीकरण पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए गोदियाल ने कहा कि उनकी नियुक्ति वर्ष 2003 में हुई थी। वर्ष 2010 में भाजपा सरकार के दौरान उनके नियमितीकरण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया और वर्ष 2014 में शासन स्तर पर उसे स्वीकृति मिली। ऐसे में नियमितीकरण का निर्णय शासन द्वारा लिया गया था।
उन्होंने कहा कि वास्तविक मुद्दा यह नहीं है कि कर्मचारी की नियुक्ति या नियमितीकरण कब हुआ। असली सवाल यह है कि बद्रीनाथ धाम में दानराशि की कथित चोरी किसके कार्यकाल में हुई। यदि सीसीटीवी फुटेज में नकदी गायब होने जैसी बातें सामने आ रही हैं और मंदिर समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं, तो इसकी जवाबदेही वर्तमान बीकेटीसी प्रबंधन और राज्य सरकार की बनती है।
गोदियाल ने आरोप लगाया कि भाजपा हर बड़े विवाद में अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए कांग्रेस नेताओं को घसीटने का प्रयास करती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसी भी तथ्य या बहस से पीछे हटने वाली नहीं है। यदि बीकेटीसी अध्यक्ष में साहस है तो वे किसी भी सार्वजनिक मंच पर तथ्यों के आधार पर चर्चा करें।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि उनके कार्यकाल में कोई अनियमितता हुई थी, तो भाजपा की पूर्ण बहुमत सरकार ने पिछले नौ वर्षों में कोई कार्रवाई क्यों नहीं की।
प्रेस वार्ता के अंत में गणेश गोदियाल ने कहा कि देवभूमि की आस्था सर्वोपरि है। मंदिरों की दानराशि, व्यवस्थाओं और श्रद्धालुओं के विश्वास की रक्षा करना सरकार और मंदिर समिति की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।
नोट: यह प्रेस वार्ता में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल द्वारा लगाए गए आरोप और उनके पक्ष पर आधारित खबर है। मामले में बीकेटीसी और राज्य सरकार का पक्ष अलग हो सकता है।
