1 May 2026

आखिर क्या कुछ है यूसीसी में, कैसे उत्तराखंड बना UCC को लेकर टॉप, पढ़िए विस्तार में

0
IMG-20240206-WA0010-scaled.jpg

उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है जिसने विधानसभा में यूसीसी का ड्राफ्ट पेश कर दिया है और पूरी उम्मीद है कि जल्द ही यूसीसी विधानसभा से पास हो जायेगा। क्योंकि प्रदेश की धामी सरकार को विधानसभा में पूरा बहुमत हैनिस लिए भी सरकार के सामने यूसीसी के ड्राफ को पास करवाने में कोई परेशानी भी नही होगी।

 

संवैधानिक जरूरत पड़ी तो इस कानून को लागू करने से पहले अनुमोदन के लिए राष्ट्रपति के भेजा जाएगा। लेकिन, वहां भी इसकी मंजूरी में कोई अड़चन नहीं आएगी क्योंकि तमाम परिस्थितियां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मंशा के अनुकूल हैं।

।।।।।।।।।।।।क्या कुछ रहा आज खास।।।।।।।।।

आज सुबह सीएम धामी भारत के संविधान को अपने हाथ में लेकर साथ में संसदीय कार्य मंत्री यूसीसी के नए ड्रॉप को लेकर विधानसभा में पहुंचे। सीएम धामी जिस समय सदन के अंदर पहुंचे तो वह काफी उत्साहित नजर आ रहे थे वजह थी 2022 के विधानसभा में किए गए अपने वायदे को पूरा करने की तरफ आखिर कदम बढ़ाना। सीएम धामी ने यूसीसी के ड्राफ को टेबल किया, इस दौरान जहां बीजेपी के विधायकों ने जय श्री राम और भारत माता कि जय के नारे लगाए तो विपक्ष के विधायकों ने बाबा साहेब आंबेडकर अमर रहे के नारे लगाए। इस दौरान विपक्ष ने जमकर हंगामा भी किया। बावजूद हंगामे के सीएम धामी ने ड्राफ को टेबल किया और इसके बाद 2 बजे तक के लिए सदन को स्थगित कर दिया गया, ताकि ड्राफ को सभी विधायक पढ़ सके और समझ सके।

 

समान नागरिक संहिता (UCC) के रूप में एक ऐसा कानून जो जाति से परे, धर्म से परे, यहां तक कि आप स्त्री हैं या पुरुष, इससे भी परे होगा। जिस कानून में आम और खास का भेद नहीं होगा। यानि जो सभी के लिए एक समान होगा। वहीं फिलहाल एसटी जनजाति को इससे बाहर रखा गया है।

ये भी पढ़ें:   राष्ट्रपति निकेतन के सामने खुली अंग्रेजी शराब की दुकान, लगातार विरोध जारी

 

 

202 पेज के समान नागरिक संहिता अधिनयम 2024 का ड्राफ्ट हर पहलू पर विचार विमर्श करने के बाद तैयार किया गया है। सलीके से तैयार किए गए इस ड्राफ्ट में शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने से जुड़े मामलों को ही शामिल किया गया है। इन विषयों, खासतौर पर विवाह प्रक्रिया को लेकर जो प्राविधान बनाए गए हैं उनमें हर जाति, धर्म अथवा पंथ की परम्पराओं और रीति रिवाजों से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। वैवाहिक प्रक्रिया में धार्मिक मान्यताओं पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। धार्मिक रीति-रिवाज जस के तस रहेंगे। ऐसा भी नहीं है कि शादी पंडित या मौलवी नहीं कराएंगे। खान-पान, पूजा-इबादत, वेश-भूषा पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। लेकिन सख्ती इस बात पर की गई है कि हर दम्पती को अनिर्वाय रूप से अपनी शादी का रजिस्ट्रेशन करना पड़ेगा। अन्यथा वे सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने से वंचित रहेंगे। तलाक के बगैर कोई व्यक्ति दूसरी शादी नहीं कर पाएगा। ऐसा करने पर उसे दण्ड या आर्थक दण्ड या फिर दोनो भुगतने होंगे।

 

 

अधिनियम में जहां एक ओर विवाह, तलाक और विवाह की शून्यता के पंजीकरण के लिए सुगम एवं सरल प्रक्रिया बनाई गई है। सम्बंधित दम्पती और अधिकारियों की भी जिम्मेदारी व जवाबदेही तय की गई है। यदि कोई नागरिक विवाह का पंजीकरण करने में अनदेखी करता है या नियमों का पालन नहीं करता है तो उसके लिए अधिकतम 25000 के अर्थदण्ड का प्राविधान रखा गया है। साथ ही यदि उप निबंधक जानबूझकर संहिता में निहित कार्यवाही करने में विफल रहता है तो वह भी अधिकतम 25000 रुपये के अर्थदण्ड का अधिकारी होगा।

ये भी पढ़ें:   देहरादून पुलिस की बड़ी कार्रवाई: एनकाउंटर में मारा गया कुख्यात अपराधी अकरम, 14 साल बाद मिला 'अंकित' को न्याय

 

विवाह, तलाक एवं विवाह की शून्यता के पंजीकरण के लिए एक सरकारी तंत्र बनाया जाएगा। जिसमें महा निबंधक सचिव स्तर, निबंधक उपजिलाधिकारी एवं उप निबंधक राज्य सरकार के अधिसूचित अधिकारी होंगे। नागरिकों के पास सूचना का अधिकार की तर्ज पर रजिस्ट्रेशन को लेकर अपील का अधिकार भी होगा। निबंधक एवं महा निबंधक दो अपीलीय स्तर के अधिकारी होंगे। साथ ही हर स्तर पर पंजिका का रखरखाव किया जाएगा। ताकि पारदर्शिता बनी रहे। अपील के लिए समयबद्ध समय सीमा भी तय की गई है, ताकि प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।

 

संहिता में दाम्पत्य अधिकारों को सरुक्षित बनाने के हर संभव प्राविधान किए गए हैं। साथ ही जो महर, प्रभूत, स्त्रीधन या कोई अन्य सम्पत्ति जो पत्नी को उपहार स्वरूप दी गई है, वह भरण पोषण के दावे में सम्मिलित नहीं होकर अतिरिक्त होगी। 5 वर्ष से कम आयु के बच्चे की अभिरक्षा सामान्यत माता के पास रहेगी। संहिता में बच्चों की अभिरक्षा के अन्तर्गत बच्चों का हित सर्वोत्तम एवं कल्याण सर्वोपरि होगा। कोई विवाद होने पर दम्पती के मेल मिलाप के लिए न्यायालय हरसंभव समुचित प्रयास करेंगे।

 

शून्य एवं शून्यीकरण विवाह के लिए नियम बनाए गए हैं। विवाह विच्छेद के लिए किसी भी पक्ष को मारकर्म, क्रूरता, कम से कम दो वर्ष तक बिना युक्तियुक्त कारण से अलगाव, धर्म परिवर्तन, विकृत चित, निरन्तर मानसिक विकार, संचारी यौन रोग, लगातार 7 वर्ष तक किसी पक्ष के जीवित रहने की सूचना नहीं होने का आधार लिया गया है। विवाह विच्छेदन की कार्यवाही अनुतोष एवं आपसी सहमति से ही जा सकेगी। सबसे महत्वपूर्ण बात है कि किसी भी प्रथा, रूढ़ि परम्परा या किसी पक्षकार को किसी व्यक्तिगत विधि या अधिनियम के अनुसार विवाह विच्छेदन (तलाक) नहीं हो सकेगा। इस संहिता के लागू होने के बाद संहिता में प्राविधानित प्रक्रिया के अनुसार ही विवाह विच्छेदन होगा। पुरुष-महिला को तलाक देने के समान अधिकार होंगे। लिव-इन रिलेशनशिप डिक्लेयर करना जरूरी होगा। लिव इन रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर 6 माह की सजा होगी। लिव-इन में पैदा बच्चों को संपत्ति में समान अधिकार मिलेगा।

ये भी पढ़ें:   सीएम धामी की कैबिनेट बैठक में लिए गए कई महत्त्वपूर्ण निर्णय

।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।

• इसके अलावा अलग-अलग जातियों के लोगों को एक-दूसरे से शादी करने का अधिकार है ले कोई व्यक्ति एक शादी के रहते दूसरी शादी नहीं कर सकता है।

 

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड :

 

• देश के मुस्लिमों के लिए मुस्लिम पसर्नल लॉ बोर्ड है। इसके लॉ के अंतर्गत शादीशुदा मुस्लिम्म पुरुष अपनी पत्नी को महज तीन बार तलाक कहकर तलाक दे सकता है।

 

• हालांकि मुस्लिम पर्सनल लॉ में तलाक के और भी तरीके दिए गए हैं, लेकिन उनमें से तीन बा तलाक भी एक प्रकार का तलाक माना गया है, जिसे कुछ मुस्लिम विद्वान शरीयत के खिलाफ बताते हैं।

 

• तलाक के बाद अगर दोनों फिर से शादी करना चाहते हैं तो महिला को पहले किसी और पुरुष साथ शादी रचानी होगी, इसे हलाला कहा जाता है।

 

•  तलाक लेने के बाद ही वो पहले पति से फिर शादी कर सकती है। इस लॉ में महिलाओ तलाक के बाद पति से किसी तरह के गुजारे भत्ते या संपत्ति पर अधिकार नहीं दिया गया है ब मेहर अदायगी का नियम है।

 

• तलाक लेने के बाद मुस्लिम पुरुष तुरंत शादी कर सकता है जबकि महिला को इद्दत के निश्थि गुज़ारने पड़ते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WordPress GPL Chefmaster – Restaurant & Cafe Elementor Template Kit Chefmaster – Restaurant WordPress Theme Chelsey – Portfolio Theme for Freelancers and Agencies ChemicLab – Science Research & Laboratory Elementor Template Kit Chemistry – Responsive Portfolio & Shop WP Theme Chicago – Restaurant & Cafe WordPress Theme Chicky – WordPress Fashion Marketplace Theme Chief – Modern Barbershop Template Kit Chikapoe – Pet Care & Veterinary Elementor Template Kit Childhood Kids – Child Care Center Elementor Template Kit