27 October 2026

देहरादून के 24 वॉटर एटीएम बिना टेंडर ITI को देने की तैयारी, नगर निगम की प्रक्रिया पर उठे सवाल

0
Screenshot_2026-10-27-18-46-46-91_680d03679600f7af0b4c700c6b270fe7

नगर निगम देहरादून शहर के 24 वॉटर एटीएम के संचालन, रखरखाव और उन पर विज्ञापन के अधिकार ITI लिमिटेड को देने की तैयारी में है। जानकारी के अनुसार यह काम खुले टेंडर के बिना, सीधे नामांकन (nomination) के आधार पर दिया जा रहा है।

वॉटर एटीएम जनता की सुविधा से जुड़ी सार्वजनिक संपत्ति है, और इसके साथ विज्ञापन से होने वाली आय के अधिकार भी जुड़े हैं। ऐसी परियोजना को बिना प्रतिस्पर्धा के किसी एक कंपनी को देना प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।

पृष्ठभूमि

• शहर में 24 वॉटर एटीएम पहले से लगे हैं, जिनमें से कई बंद या खराब स्थिति में बताए जाते हैं।

• ITI लिमिटेड ने इन्हें PPP मॉडल पर चलाने का प्रस्ताव नगर निगम को दिया है।

• नगर निगम ने इस परियोजना के लिए अपनी 20 शर्तें भी तय की हैं, यानी परियोजना का पूरा खाका तैयार है। इसके बावजूद इसे खुले टेंडर में डालने के बजाय सीधे एक कंपनी को देने की तैयारी है।

प्रक्रिया पर सवाल

1. जब नगर निगम ने स्वयं शर्तें तय कर ली हैं, तो इन्हीं शर्तों पर खुला टेंडर क्यों नहीं निकाला गया?

2. नामांकन के आधार पर काम देने का निर्णय किस बैठक में, किस अधिकारी ने और किस नियम के तहत लिया?

3. क्या इसके लिए बोर्ड या शासन की अनुमति ली गई है? यदि हाँ, तो टेंडर न करने का क्या कारण दर्ज किया गया?

4. क्या बाज़ार में अन्य कंपनियों की रुचि जानने के लिए कोई सूचना या विज्ञप्ति जारी की गई?

ITI की योग्यता पर सवाल

ये भी पढ़ें:   बर्मिंघम में पद्मश्री प्रीतम भरतवाण का ऐतिहासिक सांस्कृतिक कार्यक्रम

1. ITI लिमिटेड मुख्य रूप से टेलीकॉम उपकरण बनाने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है। पेयजल शुद्धिकरण, RO प्लांट या वॉटर एटीएम संचालन का उसका क्या अनुभव है?

2. देश में ITI ने कहाँ-कहाँ वॉटर एटीएम चलाए हैं, और उनका प्रदर्शन कैसा रहा है?

3. इस परियोजना की आय का बड़ा हिस्सा विज्ञापन से आना है। क्या ITI के पास इस क्षेत्र का कोई अनुभव है?

4. क्या ITI यह काम स्वयं करेगी, या नामांकन से काम लेकर इसे किसी निजी कंपनी को सौंप देगी? यदि अंततः काम कोई निजी कंपनी ही करेगी, तो उसका चयन खुले टेंडर से क्यों नहीं हो रहा?

IT परियोजना या सामान्य सार्वजनिक सुविधा?

वॉटर एटीएम मूल रूप से एक सामान्य सार्वजनिक सुविधा है, जिसमें शामिल हैं:

• पानी साफ करने की मशीन

• डिस्पेंसर

• बिजली-पानी कनेक्शन

• नियमित सफाई और रखरखाव

कार्ड या सिक्के से पानी देने जैसा तकनीकी हिस्सा इसमें बहुत छोटा है। सवाल उठता है कि क्या इसे “IT/स्मार्ट सिटी परियोजना” के रूप में प्रस्तुत करके एक IT/टेलीकॉम PSU को देने का रास्ता बनाया जा रहा है, ताकि टेंडर की अनिवार्यता से बचा जा सके।

नगर निगम की मंशा पर सवाल

1. प्रस्ताव, शर्तें और अनुमति से जुड़े दस्तावेज़ सार्वजनिक क्यों नहीं किए गए?

2. नामांकन से नगर निगम को कितनी आय होगी, और खुले टेंडर से कितनी हो सकती थी? क्या इसका कोई आकलन किया गया?

3. लंबी अवधि के लिए सार्वजनिक संपत्ति और विज्ञापन अधिकार एक कंपनी को सौंपने से पहले प्रतिस्पर्धा का अवसर क्यों नहीं दिया गया?

4. जनता को पानी किस दर पर मिलेगा, और यह किसने और कैसे तय किया?

ये भी पढ़ें:   बर्मिंघम में पद्मश्री प्रीतम भरतवाण का ऐतिहासिक सांस्कृतिक कार्यक्रम

नियम क्या कहते हैं

• उत्तराखण्ड अधिप्राप्ति नियमावली, 2025 (अधिसूचना संख्या 47/XXVII(7)32(1)/2025, दिनांक 13.08.2025) नियम 1.1.3 के अनुसार नगरीय स्थानीय निकायों पर भी लागू है। नियम 2.1.2 के अनुसार सभी अधिप्राप्तियाँ निविदा के माध्यम से ही की जाएंगी। नियम 4.4.3 स्पष्ट कहता है कि नामांकन द्वारा चयन से सामान्यतः बचना चाहिए, क्योंकि इसमें प्रतिस्पर्धा का लाभ नहीं मिलता, पारदर्शिता का अभाव होता है और अवांछनीय रीति को प्रोत्साहन मिलता है।

• नियमावली में सरकारी उपक्रमों को नामांकन से काम देने की छूट केवल “उनकी विशेषज्ञता के कार्यों” के लिए है, और ₹50 लाख से अधिक के कार्य के लिए वित्त विभाग की सहमति आवश्यक है। प्रश्न यह है कि वॉटर एटीएम संचालन ITI की विशेषज्ञता कैसे है, और क्या वित्त विभाग की सहमति ली गई है?

• सर्वोच्च न्यायालय ने Akhil Bhartiya Upbhokta Congress बनाम मध्य प्रदेश राज्य (2011) 5 SCC 29 और Ramana Dayaram Shetty बनाम International Airport Authority of India (1979) 3 SCC 489 में स्पष्ट किया है कि कोई भी सरकारी संस्था सार्वजनिक संपत्ति या अधिकार अपने विवेक से किसी को नहीं दे सकती। यह कार्य पारदर्शी, सार्वजनिक और प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया से ही होना चाहिए। मनमाना आवंटन संविधान के अनुच्छेद 14 के विरुद्ध है।

नगर निगम देहरादून से पूछे जाने वाले प्रश्न

1. टेंडर क्यों नहीं? उत्तराखण्ड अधिप्राप्ति नियमावली, 2025 का नियम 2.1.2 कहता है कि सभी अधिप्राप्तियाँ निविदा से होंगी, और नियम 4.4.3 नामांकन से बचने को कहता है। फिर 24 वॉटर एटीएम का काम बिना टेंडर ITI को देने की तैयारी किस नियम, किस आदेश और किस अधिकारी के निर्णय के आधार पर की जा रही है? उस निर्णय की फाइल नोटिंग सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?

ये भी पढ़ें:   बर्मिंघम में पद्मश्री प्रीतम भरतवाण का ऐतिहासिक सांस्कृतिक कार्यक्रम

2. ITI की विशेषज्ञता क्या है? नियमावली में सरकारी उपक्रम को नामांकन से काम केवल “उसकी विशेषज्ञता के कार्य” के लिए दिया जा सकता है। ITI एक टेलीकॉम उपकरण बनाने वाली कंपनी है। देश में उसने अब तक कितने वॉटर एटीएम या RO प्लांट चलाए हैं, और कहाँ? क्या नगर निगम ने यह अनुभव जाँचा? यदि हाँ, तो उसका रिकॉर्ड दिखाएँ।

3. वित्त विभाग की सहमति कहाँ है? इस परियोजना का मूल्य ₹50 लाख से कहीं अधिक है। ऐसे में नामांकन के लिए वित्त विभाग की सहमति अनिवार्य है। क्या यह सहमति ली गई है? यदि हाँ, तो उसकी संख्या और दिनांक क्या है? यदि नहीं, तो प्रक्रिया आगे कैसे बढ़ाई जा रही है?

4. वॉटर एटीएम “IT परियोजना” कैसे है? मशीन, फिल्टर, पानी-बिजली कनेक्शन और सफाई जैसे इस साधारण जनसुविधा के काम को IT परियोजना बताने का आधार क्या है? क्या यह वर्गीकरण केवल इसलिए किया गया ताकि एक IT PSU को बिना टेंडर काम दिया जा सके?

5. असल में काम कौन करेगा, और नगर निगम को नुकसान कितना? क्या ITI यह काम स्वयं करेगी, या किसी निजी कंपनी को सौंपेगी? यदि कोई निजी कंपनी है, तो उसका नाम क्या है, और उसे टेंडर से क्यों नहीं चुना गया? साथ ही, खुले टेंडर से नगर निगम को कितनी आय हो सकती थी? क्या इसका कोई आकलन हुआ, या नामांकन से होने वाले राजस्व नुकसान की ज़िम्मेदारी तय की गई है?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed