17 October 2026

अस्पताल में बड़ी लापरवाही: लड़के के बदले परिजनों को थमाई लड़की, हंगामा

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देहरादून:

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल दून अस्पताल—से एक गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। अस्पताल के लेबर रूम में नवजात शिशुओं की अदला-बदली का आरोप लगाते हुए परिजनों ने देर रात जमकर हंगामा किया। पीड़ित परिवार का दावा है कि डिलीवरी के तुरंत बाद उन्हें बेटा होने की सूचना दी गई थी, लेकिन बाद में उन्हें एक बच्ची सौंप दी गई।

क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रसूता के परिजनों का कहना है कि डिलीवरी के समय अस्पताल के स्टाफ ने उन्हें बेटा होने की बधाई दी थी। परिजनों के मुताबिक, शुरुआती कागजी कार्रवाई और मौखिक सूचना में भी लड़के का ही उल्लेख था।

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हालांकि, कुछ समय बीतने के बाद जब नवजात शिशु को परिजनों को सौंपा गया, तो वह लड़की थी। इस पर तीमारदारों ने कड़ी आपत्ति जताई और अस्पताल प्रशासन पर बच्चा बदलने या गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए लेबर रूम के बाहर विरोध शुरू कर दिया।

पुलिस की मौजूदगी और परिजनों का आक्रोश

हंगामे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस बल मौके पर पहुँचा और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। पीड़ित परिवार का स्पष्ट कहना है:

“हमें शुरुआत में आधिकारिक रूप से बताया गया था कि बेटा हुआ है। अब अचानक लड़की सौंपकर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। यह सीधे तौर पर स्टाफ की लापरवाही या किसी बड़े गड़बड़झाले का इशारा है।”

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अस्पताल प्रशासन का पक्ष

मामले के तूल पकड़ते ही दूण अस्पताल प्रबंधन में हड़कंप मच गया। अस्पताल प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत उच्चस्तरीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।

अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारियों के अनुसार:

रिकॉर्ड की जांच: लेबर रूम के एंट्री रजिस्टर, ड्यूटी रोस्टर और नवजात को लगाए गए टैग्स की गहनता से जांच की जा रही है।

स्टाफ से पूछताछ: घटना के वक्त लेबर रूम में तैनात डॉक्टर, नर्स और अन्य पैरामेडिकल स्टाफ के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

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सख्त कार्रवाई का आश्वासन: प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि यह महज कागजी रिकॉर्ड दर्ज करने में हुई मानवीय भूल है या बच्चा बदलने की साजिश, जांच के बाद दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर सच्चाई साबित करने के लिए डीएनए (DNA) टेस्ट का सहारा भी लिया जाएगा।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठते सवाल

राजधानी के सबसे प्रमुख अस्पताल में हुई इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और नवजात शिशुओं की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। फिलहाल मामले की जांच जारी है और तीमारदार पारदर्शी कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं।

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