4 May 2026

बंगाल, असम की चुनावी जीत में प्रभावी रहा ‘उत्तराखंड मॉडल’ 

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पश्चिम बंगाल और असम में भाजपा को मिली प्रचंड जीत में ‘उत्तराखंड मॉडल’ की भी छाप नजर आती है। भाजपा ने पश्चिम बंगाल और असम के घोषणा पत्र में, उत्तराखंड की तर्ज पर यूसीसी लागू करने का वादा किया था। जिसे मतदाताओं ने अपना समर्थन दे दिया है। इस तरह गंगोत्री (उत्तराखंड) से निकली यूसीसी की गंगा अब गंगा सागर ( पश्चिम बंगाल) तक पहुंचती नजर आ रही है।

समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी अब देश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। यूं तो ये मुद्दा आजादी के समय ही राष्ट्रीय विमर्श में छाया हुआ था, लेकिन इसे धरातल पर उतारने की पहल, 2022 के विधानसभा चुनाव के समय उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने की। इसी क्रम में जनवरी 2025 से उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू हो चुकी है। उत्तराखंड में यूसीसी लागू करने के बाद भाजपा अब दूसरे राज्यों में भी इसे चुनावी एजेंडे के रूप में आगे बढ़ा रही है। इसी क्रम में बंगाल और असम के चुनावी घोषणा पत्र में यूसीसी को प्रमुखता से शामिल किया गया। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि भाजपा ने यूसीसी को नागरिक समानता, महिला अधिकार जैसा व्यापक आधार देकर, मतदाताओं के बड़े वर्ग तक पहुंचा दिया है। खासकर शहरी वर्ग और महिला तथा युवा मतदाताओं के बीच इस मुद्दे को लेकर चर्चा देखने को मिल रही है। राजनीतिक रूप से भाजपा इसे अपने बड़े वैचारिक एजेंडे के तौर पर देख रही है। पार्टी पहले ही अनुच्छेद 370 और राम मंदिर जैसे मुद्दों को पूरा कर चुकी है। अब यूसीसी को अगले बड़े राष्ट्रीय एजेंडे के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। इस तरह असम और पश्चिम बंगाल में भाजपा को मिली जीत ने यूसीसी के उत्तराखंड मॉडल की कामयाबी पर मुहर लगा दी है। जो अगले साल उत्तराखंड में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों में भी निर्णायक साबित हो सकता है।

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उत्तराखंड बना भाजपा का “मॉडल स्टेट”

उत्तराखंड आजाद भारत का का पहला राज्य है जहां यूसीसी लागू हुआ है। इसमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशन जैसे विषयों को एक समान कानूनी ढांचे में लाया गया। भाजपा लगातार इसे महिला अधिकार और समानता से जोड़कर प्रचारित कर रही है। उत्तराखंड के बाद गुजरात की भाजपा सरकार भी यूसीसी लागू करने की दिशा में काम शुरु कर चुकी है। गुजरात में यूसीसी पर गठित समिति अपनी रिपोर्ट वहां के को सौंप चुकी है। गुजरात का मसौदा काफी हद तक उत्तराखंड मॉडल पर ही आधारित है।

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