17 August 2026

दून अस्पताल में जब जमीनी हकीकत जानने पहुंची महिला पत्रकार, तब EMO ने बैठा दिया चौकी में, अब लिखित में मांगी माफ़ी

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देहरादून।

 

दून मेडिकल कॉलेज में महिला पत्रकार मीना नेगी से EMO ने बदसलूकी और मोबाइल भी छीन लिया साथ ही घंटों तक बैठाकर भी रखा।  घटना के करीब दस दिन बाद, दबाव और जांच के बीच आरोपी ईएमओ (EMO) डॉ. समृद्धि को अंततः लिखित में माफी मांगनी पड़ी है। EMO इस पूरे प्रकरण में कई तरह की कहानियां बना रही थी। साथ ही अपने स्टाफ के साथ मिलकर मीना नेगी को ही दोषी साबित करने में जुटी हुई थी। अंततः जब खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ मंत्री सुबोध उनियाल से इस बात की शिकायत की गई और स्वास्थ मंत्री द्वारा 3 दिन में जांच के निर्देश दिए गए तब जाकर डॉक्टर समृद्धि और उनके साथ दोषी बाकी स्टाफ की तेवर हल्के पड़े और अब जाकर उन्होंने लिखित में माफी मांग ली है।

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हालांकि, इस माफीनामे के बाद भी अस्पताल प्रशासन और उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

क्या था पूरा मामला?

घटना 23 अप्रैल की रात की है, जब ‘दैनिक जागरण-आईनेक्स्ट’ की महिला पत्रकार मीना नेगी अस्पताल की इमरजेंसी सेवाओं की जमीनी हकीकत जानने के लिए वहां पहुंची थीं। आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात ईएमओ डॉ. समृद्धि ने न केवल उनके साथ अभद्रता की, बल्कि उनका मोबाइल फोन छीनकर उन्हें अस्पताल स्थित पुलिस चौकी में घंटों बैठाए रखा।

मुख्य बिंदु और विवाद:

कार्यवाही में देरी: घटना के दस दिनों तक मामला दबा रहा। सवाल यह उठ रहा है कि जब घटना उसी दिन संज्ञान में आ गई थी, तो तत्काल कार्यवाही क्यों नहीं की गई?

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उच्च स्तरीय हस्तक्षेप: मामला तब गरमाया जब इसे विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने उठाया गया। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद ही जांच कमेटी सक्रिय हुई। इसके साथ ही स्वास्थ मंत्री सुबोध उनियाल ने भी इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया और उन्होंने भी सही और निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए।

जिम्मेदारों की भूमिका: इमरजेंसी इंचार्ज डॉ. एनएस बिष्ट की भूमिका पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं। आरोप है कि जानकारी होने के बावजूद उन्होंने मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की।

प्रशासनिक कदम: मेडिकल कॉलेज की प्राचार्या डॉ. गीता जैन ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद ईएमओ से लिखित माफी मंगवाई है।

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व्यवस्था पर सवाल

इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में मीडिया कर्मियों के साथ व्यवहार और वहां की जवाबदेही पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। प्राचार्या डॉ. गीता जैन का कहना है कि डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों का व्यवहार मरीजों और तीमारदारों के प्रति संयमित होना चाहिए, अन्यथा ऐसे विवाद व्यवस्था की छवि खराब करते हैं।

माफी मांगे जाने के बावजूद, इस मामले ने पूरे सिस्टम की कार्यशैली और अधिकारियों की मंशा को कटघरे में खड़ा कर दिया है। देखना यह होगा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अस्पताल प्रशासन क्या ठोस कदम उठाता है।

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