6 November 2026

विश्व स्तर पर केंद्र बिंदु बना: उत्तराखंड दौरे पर पहुँचे हिमालयन समर्पण ध्यान के संस्थापक परम पूज्य श्री शिवकृपानंद स्वामीजी

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योगेश सेमवाल/ऋषिकेश

आज के आधुनिक और रफ्तार भरे दौर में लोग शारीरिक रूप से भले ही मजबूत नजर आ रहे हों, लेकिन मानसिक रूप से वे लगातार कमजोर और तनावग्रस्त होते जा रहे हैं। ऐसे में यह सवाल हर किसी के मन में उठता है कि खुद को मानसिक तौर पर कैसे मजबूत किया जाए और इस भागदौड़ भरी जिंदगी में आंतरिक शांति कैसे हासिल की जाए? इसी5 महत्वपूर्ण विषय को लेकर दुनियाभर में सम्मानित भारतीय आध्यात्मिक गुरु और ‘हिमालयन समर्पण ध्यान’ के संस्थापक परम पूज्य श्री शिवकृपानंद स्वामीजी निरंतर वैश्विक स्तर पर कार्य कर रहे हैं।

इसी सिलसिले में स्वामीजी अपने उत्तराखंड दौरे के दौरान पहुँचे, जहाँ उन्होंने उत्तराखंड के प्रमुख पत्रकारों से मुलाकात की और उन्हें अध्यात्म के गहरे रहस्यों से अवगत कराया। इस दौरान पत्रकारों ने उनसे आधुनिक जीवनशैली और वर्तमान समय के तनाव भरे जीवन से बाहर निकलने को लेकर कई तीखे और महत्वपूर्ण सवाल पूछे। स्वामीजी ने अत्यंत सरलता, सहजता और गहराई के साथ सभी पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए, जिससे सभी को मानसिक तनाव से मुक्ति पाने की सही राह मिली।

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विश्व मंच पर भारत का बढ़ा मान: स्वामीजी को मिली बड़ी वैश्विक जिम्मेदारी

हाल ही में, परम पूज्य श्री शिवकृपानंद स्वामीजी को ‘विश्व ध्यान दिवस संचालन समिति’ का उपाध्यक्ष और दक्षिण एशिया क्षेत्र का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह ऐतिहासिक नियुक्ति ‘विश्व ध्यान दिवस संघ’ और ‘विश्व ध्यान फाउंडेशन’ के बीच एक संयुक्त समझौते के माध्यम से औपचारिक रूप से घोषित की गई है।

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लीटेंस्टीन का प्रतिनिधित्व करने वाले कार्यकारी अध्यक्ष एनरिको सोम्मा सहित कई वैश्विक हस्तियों के बीच, स्वामीजी उच्च स्तरीय अंतरराष्ट्रीय ब्यूरो में मुख्य प्रस्तावक राष्ट्र के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। यह नियुक्ति इस बात का प्रमाण है कि आज आधुनिक विक्षंदन, तनाव की महामारी, भू-राजनीतिक संघर्ष और संज्ञानात्मक थकान से जूझ रहे वैश्विक संस्थानों द्वारा प्रामाणिक हिमालयन ध्यान प्रवाहों की मांग तेजी से बढ़ रही है।

“विश्व शांति कभी पुस्तक या हथियार से नहीं आ सकती”

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परम पूज्य श्री शिवकृपानंद स्वामीजी ने अपने संदेश में स्पष्ट किया है कि “विश्व शांति किसी पुस्तक या हथियार से कभी नहीं आ सकती; विश्व शांति केवल आंतरिक शांति से ही शुरू हो सकती है।”

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को दुनिया भर में अपनाए जाने के बाद, स्वामीजी की यह वैश्विक नियुक्ति समग्र कल्याण और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व (वसुधैव कुटुंबकम) के लिए भारत की मार्गदर्शक भूमिका को और अधिक मजबूत करती है। उत्तराखंड के पत्रकारों के साथ हुई यह विशेष चर्चा आधुनिक जीवन में मानसिक मजबूती, ध्यान (Meditation) और आंतरिक संतुलन के महत्व को रेखांकित करती है, जिससे समाज को एक नई दिशा मिलेगी।

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