सीएम धामी, त्रिवेंद्र और बलूनी की मुलाकात के राजनीतिक मायने, क्या खत्म हुई दूरियां?
उत्तराखंड की राजनीति में एक तस्वीर इन दिनों खूब चर्चा में है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से हरिद्वार सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत तथा गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी की मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। वैसे तो मुख्यमंत्री धामी से रोजाना कई बड़े नेता और जनप्रतिनिधि मुलाकात करते रहते हैं, लेकिन इस मुलाकात को सामान्य राजनीतिक शिष्टाचार से कहीं ज्यादा माना जा रहा है।
दरअसल, पिछले लंबे समय से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, त्रिवेंद्र सिंह रावत और अनिल बलूनी के बीच रिश्तों में खटास की खबरें सामने आती रही हैं। कई बार सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं में यह बातें भी उठती रहीं कि भाजपा के इन बड़े नेताओं के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। हालांकि भाजपा नेतृत्व ने हमेशा इन खबरों को अफवाह बताया, लेकिन राजनीतिक हलकों में इन चर्चाओं ने लगातार जगह बनाए रखी।

अब जो तस्वीर सामने आई है, उसने कई संकेत दिए हैं। तस्वीर में तीनों नेता बेहद सहज और सकारात्मक अंदाज में नजर आए। यही वजह है कि इस मुलाकात को भाजपा के भीतर एक बड़े राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि पार्टी अब 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट चुकी है और संगठन किसी भी तरह का आंतरिक मतभेद जनता के सामने नहीं आने देना चाहता।
उत्तराखंड में चुनावी माहौल धीरे-धीरे बनना शुरू हो चुका है। 2027 विधानसभा चुनाव में भाजपा की सबसे बड़ी चुनौती सत्ता में लगातार तीसरी बार वापसी करने की होगी। ऐसे में पार्टी के सभी बड़े नेताओं का एकजुट होकर मैदान में उतरना बेहद जरूरी माना जा रहा है। भाजपा यह अच्छी तरह जानती है कि अगर संगठन और सरकार के बीच मजबूत तालमेल रहेगा तभी चुनाव में फायदा मिल सकता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने कार्यकाल के लगभग पांच साल पूरे करने जा रहे हैं। पिछले कुछ समय में पार्टी और सरकार दोनों स्तर पर यह संकेत लगातार मिले हैं कि आने वाला विधानसभा चुनाव धामी के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। ऐसे में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और सांसदों का मुख्यमंत्री के साथ मजबूती से खड़ा होना राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा नेतृत्व अब किसी भी तरह के गुटबाजी के संदेश से बचना चाहता है। यही कारण है कि बड़े नेताओं की एकजुटता दिखाने वाली तस्वीरों और बैठकों को खास महत्व दिया जा रहा है। त्रिवेंद्र सिंह रावत और अनिल बलूनी जैसे वरिष्ठ नेताओं की मुख्यमंत्री धामी से मुलाकात ने यह संकेत जरूर दिया है कि पार्टी के भीतर अब सामंजस्य और तालमेल को प्राथमिकता दी जा रही है।
फिलहाल इस मुलाकात के राजनीतिक मायने चाहे जो भी निकाले जाएं, लेकिन इतना जरूर साफ है कि भाजपा आगामी चुनाव को लेकर अब पूरी तरह चुनावी मोड में आ चुकी है। आने वाले समय में पार्टी के भीतर और भी ऐसी तस्वीरें देखने को मिल सकती हैं, जिनका सीधा संदेश कार्यकर्ताओं और जनता तक एकजुटता दिखाने का होगा।
