7 March 2026

मौजूदा दौर में मातृ शक्ति का विजनरी होना जरूरी,गीता धामी के प्रयासों से पहली बार हुआ संगठन का प्रदेश में कार्यक्रम

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देहरादून

 

विश्वमांगल्य सभा के मातृ संस्कार समागम कार्यक्रम में मंगलवार को मौजूदा दौर की चुनौतियों के बीच मातृ शक्ति की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। कहा गया कि आधुनिकता और तकनीकी बदलाव के चलते जो चुनौतियां सामने खड़ी हैं, उसमें मातृ शक्ति का विजनरी होना जरूरी है। ताकि एक अच्छे परिवार से लेकर अच्छे समाज और राष्ट्र का निर्माण संभव हो सके।

राजकीय दून मेडिकल काॅलेज के सभागार में विभिन्न सत्रों में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। इनमें कुछ खास सत्र जनप्रतिनिधि परिवार की माताओं के लिए आयोजित किए गए। विश्वमांगल्य सभा का उत्तराखंड मेें यह पहला कार्यक्रम था, जिसका आयोजन सामाजिक चिंतक गीता धामी के प्रयासों से संभव हुआ। संगठन के राष्ट्रीय परामर्शदाता प्रशांत हरतालकर, वृषाली ताई जोशी के साथ ही विकास फाउंडेशन की अध्यक्ष मृदृला धर्मेंद्र प्रधान, राज्यसभा सदस्य रेखा शर्मा, जन प्रतिनिधि परिवार संपर्क विभाग की अखिल भारतीय संयोजक डाॅ अनुराधा यादव, डाॅ पूजा देशमुख की विभिन्न सत्रों में उपस्थिति रही। संचालन ज्योति कोटिया ने किया।

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संस्कारों की बात, हिमाचल-उड़ीसा के अनुभव

-कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की पत्नी और विकास फाउंडेशन की अध्यक्ष मृदुला धर्मेंद्र प्रधान ने संस्कारों पर जोर देते हुए हिमाचल-उड़ीसा के अपने अनुभव बताए। उन्होंने कहा कि वह हिमाचल की रहने वाली हैं, लेकिन शादी उड़ीसा में हुईं। घर परिवार के ऐसे संस्कार थे, कि एडजस्ट करने में कोई दिक्कत नहीं हुई।

 

गीता धामी के नेतृत्व में तैयार होगा संगठन

-विश्वमांगल्य सभा के इस कार्यक्रम में वरिष्ठ पदाधिकारियों की उपस्थिति में तय किया गया कि राज्य में गीता धामी के नेतृत्व में संगठन को खड़ा किया जाएगा। कार्य पद्धति से संबंधित सत्र में जन प्रतिनिधि परिवार संपर्क विभाग की अखिल भारतीय संयोजक डाॅ अनुराधा यादव ने यह जानकारी दी। उन्होंने अपने संबोधन में संगठन की कार्य पद्धति के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कहा कि उत्तराखंड में गीता धामी के नेतृत्व में जिलों में टीमें बनाई जाएंगी।

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16 वर्ष पुराना संगठन मातृ निर्माण को समर्पित

-विश्वमांगल्या सभा वर्ष 2016 में अस्तित्व में आई है। इसका उद्देश्य बदलते आधुनिक दौर की चुनौतियों के बीच माताओं को भारतीय सनातन संस्कृति के अनुरूप तैयार करना, ताकि वह समाज के व्यापक हित में अपने परिवार को तैयार कर सके। संगठन का कार्य अभी 35 प्रांतों में चल रहा है। सभा ने 25 प्रांतों में मातृ संस्कार समागम की श्रंृखला शुरू की है। इस क्रम में अभी तक देहरादून से पहले उज्जैन और अयोध्या में मातृ संस्कार समागम आयोजित हो चुका है।

 

छह ‘भ’ पर जोर, भारतीयता न होने पाए कमजोर

-कार्यक्रम में विश्वमांगल्य सभा की अखिल भारतीय संगठन मंत्री डाॅ वृषाली जोशी ने ने उपस्थित लोगों से छह भ अपनाने पर जोर दिया। यह छ भ हैं-भाषा, भूषा, भजन, भोजन, भ्रमण और भवन। उन्होंने कहा कि यह सब भारतीय होने चाहिए।

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अतिथियों ने की सीएम धामी की खुलकर सराहना

-कार्यक्रम में आए अतिथियों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की खुलकर सराहना की। विश्वमांगल्य सभा की अखिल भारतीय संगठन मंत्री डाॅ वृषाली जोशी ने समान नागरिक संहिता, धर्मांतरण विरोधी कानून आदि का जिक्र करते हुए कहा कि अभी कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र्र मोदी ने देश हित में कुछ कानूनों का जिक्र किया था और इनमें से एक को छोड़कर बाकी सभी उत्तराखंड में लागू कर दिए गए हैं। राज्यसभा सदस्य रेखा शर्मा ने कहा कि वह दून की ही रहने वाली हैं। पहले और अब में उन्हें बहुत बड़ा परिवर्तन दिखता है। धामी जी ने विकास का बेहतर कार्य किया है।

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