एसईसीएल की गेवरा खदान पहुंचे उत्तराखंड के पत्रकार: समझा खनन, सुरक्षा और मियावाकी तकनीक का मॉडल
देहरादून/कोरबा। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (भारत सरकार) के पीआईबी देहरादून द्वारा आयोजित पांच दिवसीय मीडिया एक्सपोजर टूर के दूसरे दिन उत्तराखंड के 13 सदस्यीय मीडिया दल ने साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की गेवरा ओपनकास्ट कोयला खदान का विस्तृत भ्रमण किया। पत्रकारों ने वहां कोयला उत्पादन, आधुनिक तकनीकों, सुरक्षा मानकों और पर्यावरणीय प्रबंधन के ग्राउंड मॉडल को समझा।
एशिया की सबसे बड़ी खदान का देखा संचालन
गेवरा खदान दुनिया की दूसरी और एशिया की सबसे बड़ी ओपनकास्ट कोयला खदान है, जो देश के कुल कोयला उत्पादन में लगभग 6 प्रतिशत का योगदान देती है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में यहां 59.1 मिलियन टन कोयले का उत्पादन हुआ, जिससे देश के सात राज्यों को आपूर्ति की जाती है। भ्रमण के दौरान पत्रकारों ने कोयला खनन, ओवरबर्डन हटाने, सरफेस माइनर टेक्नोलॉजी और डिजिटल मॉनिटरिंग की पूरी प्रक्रिया को करीब से देखा।
उत्तराखंड के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकती है मियावाकी तकनीक
पर्यावरण संरक्षण के तहत खदान क्षेत्र में जापानी ‘मियावाकी तकनीक’ से 2 हेक्टेयर में 20 हजार पौधे रोपे गए हैं, जिनका सर्वाइवल रेट 70% है। कम भूमि में सघन वन (Dense Forest) तैयार करने वाली यह तकनीक सीमित भू-भाग वाले उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य के लिए भी काफी उपयोगी साबित हो सकती है।
अगले साल दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी बनने का लक्ष्य
एसईसीएल के क्षेत्रीय महाप्रबंधक संजय मिश्रा और महाप्रबंधक (ऑपरेशंस) धीरज चौधरी ने बताया कि कंपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ श्रमिकों की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान दे रही है। एसईसीएल अगले वर्ष तक दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
पीआईबी देहरादून के सहायक निदेशक संजीव सुंद्रियाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ का यह मॉडल उत्तराखंड के लिए बेहद सीखने योग्य है। टूर के अगले चरण में बुधवार को मीडिया दल कोरबा स्थित एनटीपीसी (NTPC) और बाल्को (BALCO) का दौरा करेगा।