13 October 2026

उत्तराखण्ड ने केंद्र सरकार को सौंपा 5702.15 करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज का प्रस्ताव

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देहरादून।

 

आपदा प्रबंधन विभाग ने इस वर्ष मानसून के दौरान हुई क्षति की प्रतिपूर्ति तथा भविष्य में अवस्थापना संरचनाओं को संभावित नुकसान से बचाने के लिए भारत सरकार से 5702.15 करोड़ रुपये की विशेष सहायता प्रदान करने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर प्रमुख सचिव, मुख्यमंत्री आरके सुधांशु तथा सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने गुरुवार को नई दिल्ली में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, गृह मंत्रालय भारत सरकार के सदस्य एवं विभागाध्यक्ष राजेंद्र सिंह तथा एनडीएमए के सचिव मनीष भारद्वाज को ज्ञापन सौंपा।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के विभागाध्यक्ष राजेंद्र सिंह तथा सचिव मनीष भारद्वाज ने उत्तराखण्ड को हर स्तर पर सहयोग का आश्वासन दिया है। राजेंद्र सिंह ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य ने इस वर्ष मानसून सीजन में धराली, थराली जैसी भयावह आपदाओं का सामना किया है। राज्य को व्यापक क्षति हुई है, इसमें कोई दोराय नहीं। संकट की इस घड़ी में भारत सरकार राज्य के साथ खड़ी है और एनडीएमए के स्तर पर हर संभव आर्थिक सहयोग राज्य को प्रदान किया जाएगा ताकि आपदा प्रभावितों को हर स्तर पर मदद मिल सके, राज्य जल्द सामान्य स्थिति की ओर अग्रसर हो तथा आपदाओं के प्रभावों को कम करने की दिशा में दीर्घकालिक समाधान किए जा सकें।

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सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि इस वर्ष प्राकृतिक आपदा से लोक निर्माण विभाग तथा सार्वजनिक सड़कों को लगभग रू0 1163.84 करोड़, सिंचाई विभाग की परिसम्पत्तियों को लगभग रू0 266.65 करोड़, ऊर्जा विभाग को रू0 123.17 करोड़, स्वास्थ्य विभाग की परिसम्पत्तियों को लगभग रू0 4.57 करोड़, विद्यालयी शिक्षा विभाग की परिसम्पत्तियों को 68.28 करोड़, उच्च शिक्षा विभाग की परिसम्पत्तियों को रू0 9.04 करोड़, मत्स्य विभाग को 2.55 करोड़, ग्राम्य विकास विभाग को 65.50 करोड़, शहरी विकास को 04 करोड़, पशुपालन विभाग को 23.06 तथा अन्य विभागीय परिसम्पत्तियों को 213.46 करोड़ तथा इस प्रकार सभी राजकीय विभागों को कुल लगभग रू0 1944.15 करोड़ की सीधे तौर पर क्षति हुई है।

इन परिसम्पत्तियों के पुनर्निर्माण तथा पुनर्प्राप्ति में उपरोक्त धनराशि रू0 1944.15 करोड़ के साथ-साथ परिसम्पत्तियों को बचाने तथा अनेक ऐसी परिसम्पत्तियां, मार्ग, आबादी वाले क्षेत्र तथा अन्य अवस्थापना संरचानाओं को जो आपदा से क्षतिग्रस्त होने की कगार पर हैं, को स्थिर करने के लिये रू0 3758.00 करोड़ की सहायता प्रदान किए जाने का अनुरोध किया गया है। इस प्रकार वर्ष 2025 में हुई आपदा से क्षति के लिये उत्तराखण्ड राज्य को कुल रू0 5702.15 करोड़ की धनराशि की मांग की गई है, ताकि इस धनराशि से आपदा से क्षतिग्रस्त परिसम्पत्तियों की मरम्मत/पुनर्प्राप्ति/पुनर्निर्माण कराया जा सके तथा आपदा से क्षतिग्रस्त होने वाली अवस्थापना संरचनाओं/सार्वजनिक परिसम्पत्तियों/ मार्गों/आबादी वाले क्षेत्रों की सुरक्षा आदि हेतु कार्य कराया जा सके तथा उत्तराखण्ड को आपदा के प्रभाव को न्यूनतम रखा जा सके तथा बहुत बड़ी क्षति से बचा जा सके।

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सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि प्राकृतिक आपदा से वर्ष 2025 में 01 अप्रैल, 2025 से 31 अगस्त, 2025 के मध्य कुल 79 व्यक्तियों की मृत्यु हुई है, 115 लोग घायल हुए हैं तथा 90 लोग लापता हैं। कुल 3953 छोटे तथा बड़े पशुओं की मृत्यु हुई है। कुल 238 पक्के भवन ध्वस्त हुए हैं, 02 कच्चे भवन ध्वस्त हुए हैं, 2835 पक्के भवन गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं तथा 402 कच्चे भवन गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अतिरिक्त बहुत बड़ी मात्रा में व्यवसायिक भवन, दुकानें/होटल/होमस्टे, रेस्टोरेंट तथा अन्य संरचनायें क्षतिग्रस्त हुई हैं।

 

 

केंद्र से मिल रहा है भरपूर सहयोग- मुख्यमंत्री

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देहरादून। मा0 मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आपदा की इस घड़ी में मा0 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी तथा गृह मंत्री श्री अमित शाह जी लगातार राज्य के साथ खड़े रहे हैं। केंद्र सरकार ने अब तक हर संभव सहयोग प्रदान किया है, जिसके परिणामस्वरूप राहत एवं बचाव कार्यों को त्वरित गति मिली है। मा0 प्रधानमंत्री जी ने राज्य को आपदाओं से हुई क्षति के संबंध में प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए थे। प्राप्त निर्देशों के क्रम में आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं पुनर्वास कार्यों को गति देने के लिए राज्य सरकार ने भारत सरकार से विशेष सहयोग का अनुरोध किया है। हमने आग्रह किया है कि आपदा से हुई भारी क्षति की भरपाई हेतु राज्य को एक विशेष आर्थिक पैकेज प्रदान किया जाए, ताकि प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता पहुंचाई जा सके, क्षतिग्रस्त अवसंरचना का शीघ्र पुनर्निर्माण हो सके तथा आजीविका के साधनों को पुनर्स्थापित किया जा सके। उन्होंने कहा कि हमारी साझा प्रतिबद्धता ही उत्तराखंड को शीघ्र सामान्य स्थिति में लौटाने और आपदा प्रभावितों के जीवन में स्थिरता लाने में सहायक होगी।

 

 

 

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