विशाखापत्तनम में समुद्री कचरे से निपटने के लिए ‘निर्मल सागर’ (NIRMaL Sagar) पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च
विशाखापत्तनम / नई दिल्ली।
समुद्री प्रदूषण और प्लास्टिक कचरे की समस्या से निपटने के लिए भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) के स्वायत्त संस्थान ‘भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र’ (INCOIS), आंध्र विश्वविद्यालय और विज्ञान भारती (VIBHA) के सहयोग से ‘निर्मल सागर’ (NIRMaL Sagar – National Initiative for Remediation of Marine Litter) कार्यक्रम के पायलट चरण का औपचारिक शुभारंभ किया गया है।
यह पहल हफ्ते भर चले ‘स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर 5.0’ अभियान के समापन अवसर पर 19 सितंबर 2026 को आर.के. बीच स्थित आंध्र विश्वविद्यालय सभागार में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान शुरू की गई।
अंतरिक्ष तकनीक और AI/ML से होगी समुद्र की निगरानी
INCOIS के निदेशक डॉ. टी. एम. बालकृष्णन नायर ने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत ओशियन मॉडलिंग, सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस/मशीन लर्निंग (AI/ML) आधारित अत्याधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके जरिए समुद्र में प्लास्टिक और कचरे के हॉटस्पॉट्स की पहचान की जाएगी, उनकी ट्रैकिंग की जाएगी और कचरा हटाने व उसके रोकथाम के लिए वैज्ञानिक आंकड़े जुटाए जाएंगे। यह पहल संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) और ‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर’ मिशन के अनुरूप है।
मुख्य बिंदु और गणमान्य हस्तियों के संबोधन:
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह का संबोधन: केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वयंसेवकों और अधिकारियों के प्रयासों की सराहना की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वच्छ सागर और सुरक्षित सागर’ के सपने को साकार करने पर बल दिया।
खुले नालों से कचरा रोकने पर जोर: विशाखापत्तनम के सांसद श्री एम. श्रीभरत ने कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए मंत्रालय से तकनीकी व लॉजिस्टिक्स सहायता की मांग की ताकि खुले नालों के जरिए प्लास्टिक कचरा समुद्र तक न पहुंचे। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को ‘स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर’ की शपथ भी दिलाई।
सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा: पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. टी. श्रीनिवास कुमार ने बताया कि इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत विशाखापत्तनम और आसपास के तटीय क्षेत्रों में वैज्ञानिक अध्ययन किए जाएंगे। कचरा एकत्र करने के साथ-साथ सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए प्लास्टिक कचरे के रीसाइक्लिंग की रणनीति विकसित की जाएगी।
मानव श्रृंखला और अंडरवाटर क्लीनअप ड्राइव
कार्यक्रम के बाद जागरूकता फैलाने के लिए आर.के. बीच रोड पर प्रतिभागियों ने एक विशाल मानव श्रृंखला बनाई। इसके अलावा प्लैटिपस एस्केप्स के सहयोग से 18 सितंबर को विशाखापत्तनम तट के पास समुद्र के भीतर अंडरवाटर क्लीनअप (Underwater Cleanup) अभियान भी चलाया गया।
इस कार्यक्रम में आंध्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जी. पी. राजा शेखर, MoES के संयुक्त सचिव श्री जी. श्रीनिवास राव, रियर एडमिरल गोकुल कृष्णा दत्ता, कोस्ट गार्ड कमांडर अनुराग कौशिक, विज्ञान भारती के सचिव श्री विवेकानंद पाई सहित भारतीय नौसेना, तटरक्षक बल, विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों और 1300 से अधिक प्रतिभागियों तथा स्थानीय मछुआरा समुदाय ने भाग लिया।