12 September 2026

पूर्व OSD के ठिकाने पर कार्रवाई के बाद हरीश रावत का बड़ा फैसला, कांग्रेस पदों से दिया इस्तीफा

0
20260912_094625

 

देहरादून: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत के पूर्व ओएसडी (OSD) श्री जीना के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) और जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बाद प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मच गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में नकदी और आभूषण बरामद होने की बात सामने आई है। इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत और भावुक पोस्ट लिखकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है तथा पार्टी पदों से हटने का बड़ा फैसला लिया है।

हरीश रावत के आधिकारिक बयान और फेसबुक पोस्ट के मुख्य बिंदु:

1. पूर्व OSD पर लगे आरोपों पर प्रतिक्रिया

निजी छवि और दुख: हरीश रावत ने स्वीकार किया कि श्री जीना उनके OSD रहे हैं और उन्होंने सरकार व संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। उन्हें एक सज्जन और विनम्र व्यक्ति बताते हुए रावत ने कहा कि ग्राम सेवक भर्ती या OMR शीट में छेड़छाड़ के आरोप यदि सिद्ध होते हैं, तो वे उनके इस कृत्य से बेहद लज्जित हैं।

ये भी पढ़ें:   धामी सरकार की आज कैबिनेट बैठक में लिए गये कई महत्वपूर्ण फैसले

राजनीतिक नरेटिव का आरोप: रावत ने कहा कि उत्तराखंड में चुनाव के दौरान जब भी उनसे तारीखों के बारे में पूछा जाता था, तो वे मजाक में कहते थे कि “चुनाव तब होंगे जब CBI मेरे घर आएगी।” उन्होंने आरोप लगाया कि इस बार उनके घर के बजाय उनके सहयोगी के घर पर कार्रवाई करके एक राजनीतिक नरेटिव बनाने का प्रयास किया गया है।

2. कांग्रेस पदों से हटने की घोषणा

पार्टी की साख सर्वोपरि: राहुल गांधी के नेतृत्व में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे संघर्ष का जिक्र करते हुए रावत ने कहा कि वे नहीं चाहते कि उनके किसी भी सहयोगी के कृत्य से पार्टी कमजोर हो।

ये भी पढ़ें:   UKSSSC VPDO भर्ती घोटाला: पूर्व सीएम हरीश रावत के पूर्व OSD/PA के ठिकानों पर ED की बड़ी कार्रवाई

इस्तीफे का निर्णय: उन्होंने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) की कार्यकारिणी सदस्यता और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की स्थायी आमंत्रित सदस्यता से हटने का निर्णय लिया है।

3. अधीनस्थ सेवा चयन आयोग और नियुक्तियों पर सफाई

आयोग का गठन और उपलब्धियां: अपनी सरकार के कार्यकाल का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का गठन युवाओं के भविष्य के लिए किया गया था। उनके 3 साल के कार्यकाल में 42,000 से अधिक सरकारी पदों पर पारदर्शी तरीके से भर्तियां की गईं।

अध्यक्ष की नियुक्ति और खंडूरी जी का संदर्भ: आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष की नियुक्ति पर रावत ने स्पष्ट किया कि उनकी नियुक्ति पूर्व सेवा रिकॉर्ड के आधार पर की गई थी। इस संदर्भ में पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (रिटायर्ड) ने भी उनसे दो बार मुलाकात की थी। रावत ने कहा कि कोई नहीं जान सकता कि कौन व्यक्ति कहां गलती कर दे, जैसे RSS भी यह नहीं जान पाया था कि उनके पर्यावरण मंच का अध्यक्ष आगे चलकर भ्रष्ट कृत्यों में शामिल होगा।

ये भी पढ़ें:   नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय छात्रावास में सुविधाओं का विस्तार, करीब 100 बच्चों को मिलेगा शिक्षा और संरक्षण का सहारा

4. जनता से क्षमा और कानून का सामना करने की चुनौती

गलतियों के लिए क्षमा: रावत ने कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया या किसी निर्णय में उनसे कोई ‘एरर ऑफ जजमेंट’ (निर्णय की चूक) हुई है, तो वे उत्तराखंड की जनता से क्षमा मांगते हैं।

जांच एजेंसियों को खुली चुनौती: उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपील की कि यदि किसी के पास नियुक्तियों में उनकी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संलिप्तता का कोई भी प्रमाण हो, तो वे उसे CBI, ED या राज्य पुलिस को सौंपें। यदि वे दोषी पाए जाते हैं, तो कानून उन्हें जो भी दंड देगा, वे उसके लिए तैयार हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *