13 October 2026

पिछले दस वर्षों में उत्तराखंड में सरकार पूरी तरह नदारद- भुवन कापड़ी

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उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस घोषणा पत्र समिति के अध्यक्ष भुवन कापड़ी ने कहा कि पिछले दस वर्षों में उत्तराखंड में सरकार पूरी तरह नदारद रही है। केवल ‘मैनेजर’ बनकर रह गए लोग असंवेदनशील और जनता से कटे हुए हैं। लोकतंत्र का अर्थ जनता द्वारा चुनी गई और उसके प्रति जवाबदेह व्यवस्था से है, लेकिन पिछले दस वर्षों में संवाद और संवेदनशीलता का अभाव रहा। कांग्रेस का घोषणा पत्र उत्तराखंड में जनता के प्रति जवाबदेह सरकार की पुनर्स्थापना का संकल्प होगा।

भुवन कापड़ी ने घोषणा पत्र के पाँच प्रमुख मुद्दों पर प्रकाश डाला:

सरकार की पुनर्स्थापना: जनता द्वारा चुनी हुई, जवाबदेह और जनभागीदारी से संचालित सरकार की स्थापना, जो जनता के हित में निर्णय ले।

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जनता की आवाज से घोषणा पत्र: घोषणा पत्र को चुनावी वादों का दस्तावेज न बनाकर जनता की आकांक्षाओं, समस्याओं और सुझावों पर आधारित किया जाएगा, जिसमें हर वर्ग की भागीदारी होगी।

लोकतांत्रिक जवाबदेही: आने वाली कांग्रेस सरकार को वादों के प्रति राजनीतिक व लोकतांत्रिक रूप से जवाबदेह बनाया जाएगा।

नेहरूवादी समाजवाद और सार्वजनिक संस्थान: शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा को सरकार की मूल जिम्मेदारी के रूप में स्थापित किया जाएगा। सरकारी शिक्षण संस्थानों और अस्पतालों को मजबूत करने तथा पुरानी पेंशन व्यवस्था (OPS) की बहाली का प्रयास किया जाएगा।

गांधीवादी-सर्वोदयी ग्रामीण विकास: विकास का केंद्र गाँव, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और समाज का अंतिम व्यक्ति होगा। ग्राम सभाओं को अधिक अधिकार देकर ग्राम स्वराज को मजबूत किया जाएगा और स्थानीय संसाधनों पर आधारित रोजगार बढ़ाए जाएंगे।

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घोषणा पत्र समिति के संयोजक डॉ. प्रेम बहुखण्डी ने कहा कि नेहरूवादी समाजवाद और सार्वजनिक संस्थाओं की पुनर्स्थापना मुख्य ध्येय होगा। पर्वतीय क्षेत्रों में स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों को बंद करना नाकामी है। कृषि, बागवानी, पशुपालन, कुटीर उद्योग और स्थानीय उद्यमों से रोजगार बढ़ाकर पलायन रोकने का प्रयास किया जाएगा। विकास सबसे पहले अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना ही सर्वोदयी सोच है।

समिति के सदस्य सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि जिस उत्तराखंड के लिए आंदोलन हुआ, आज वहीं आंदोलनकारियों को अपनी मांगों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। कांग्रेस घोषणा पत्र निर्माण को जन-आंदोलन का स्वरूप देकर किसान, मजदूर, युवा, महिला, कर्मचारी, व्यापारी, शिक्षक, उद्यमी, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रवासी उत्तराखंडियों से संवाद करेगी।

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समिति की सदस्य सुजाता पॉल मलियाह ने कहा कि रोजगार माँगने वाले युवाओं पर लाठीचार्ज तथा जोशीमठ और हेलंग के लोगों के प्रति असंवेदनशील रवैया चिंताजनक है। धरना, प्रदर्शन और आंदोलन लोकतंत्र की ताकत हैं। सरकार का दायित्व संवाद से समाधान निकालना है।

कांग्रेस का मानना है कि उत्तराखंड की जनता घोषणा पत्र के निर्माण में सहभागी होगी और यह घोषणा पत्र आने वाली सरकार के लिए जनता के प्रति राजनीतिक प्रतिबद्धता बनेगा।

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