राम मंदिर में बड़ी चालाकी से किया गया चंदा चोरी, पड़े पूरी रिपोर्ट
अयोध्या।
देश के सबसे सुरक्षित और आस्था के केंद्र अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर से एक बेहद चौंकाने वाला और करोड़ों रुपये के घोटाले का मामला सामने जैसे ही आया उसके बाद हड़कंप मच गया…भगवान राम के नाम पर देश-विदेश से आने वाले चढ़ावे की चोरी, फर्जी बिलिंग, और मंदिर के आसपास की जमीनों की खरीद-फरोख्त में भारी धांधली के गंभीर आरोप लगे हैं… मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन भी कर दिया है, जिसने अपनी जांच तेज कर दी है।
जो सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है वो है आखिर कैसे खुली पोल? विभिन्न न्यूज चैनल और एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार
हिडन कैमरों से हुआ खुलासा
23 जनवरी 2024 को राम मंदिर के कपाट आम जनता के लिए खुलने के बाद रोजाना लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे थे, जिससे प्रतिदिन 8 से 13 लाख और त्योहारों पर 50 से 60 लाख रुपये तक का चढ़ावा आ रहा है…
इस चढ़ावे को संभालने के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के साथ एमओयू साइन किया था… हालांकि, नियमों को ताक पर रखकर एसबीआई और निजी सुरक्षा एजेंसी पर दबाव बनाकर ट्रस्ट के पदाधिकारियों के करीबियों और रिश्तेदारों को ही कैश काउंटिंग के काम में लगाया गया…
जांच में पता चला है कि साल 2025 की शुरुआत में 500 रुपये के नोटों की गड्डियां रहस्यमयी ढंग से कम होने पर शक गहराया। इसके बाद मई 2026 में एसबीआई के अधिकारियों ने काउंटिंग रूम में छिपे हुए कैमरे (Hidden Cameras) लगाए… जब 4 जून 2026 को इन कैमरों की फुटेज देखी गई, तो सुरक्षाकर्मी और कर्मचारी मुख्य सीसीटीवी कैमरों के आगे खड़े होकर व्यू ब्लॉक करते और नोटों की गड्डियां अपने कपड़ों में छुपाते हुए रंगे हाथों नजर आ रहे थे। जबकि sbi ने एक mou भी साइन किया था जिसमें बिना जेब के कपड़े उन कर्मचारियों को पहनने होते थे जो नोट गिनती में लगे हुए थे, बावजूद किसी ने इसका पालन नहीं किया… जब शक बढ़ता गया तब सुरक्षा कर्मियों की टीम भी बढ़ा दी गई…
चोरी का अनोखा तरीका:
100 की गड्डी में 120 नोट,जांच में सामने आया कि ये आरोपी एक सोची-समझी साजिश (सिंडिकेट) के तहत काम कर रहे थे… दान पेटियों से निकले नोटों को छांटते समय ये लोग 100-100 नोटों की गड्डियों की जगह उनमें 120 नोट डाल देते थे… ऊपर वाउचर 100 नोटों (यानी 50,000 रुपये) का ही बनता था, लेकिन बैंक ले जाते समय बीच रास्ते में ये आरोपी गड्डी से अतिरिक्त 20 नोट निकाल लेते थे और बैंक में वाउचर के अनुसार पूरे 100 नोट जमा कर देते थे…
ड्राइवरों और मैकेनिकों के घरों से निकले करोड़ों रुपये, लग्जरी गाड़ियां
जब पुलिस और एसआईटी ने आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी की, तो हैरान करने वाले खुलासे हुए:
अविनाश शुक्ला: 20-22 हजार रुपये की नौकरी करने वाले इस कर्मचारी के घर से 20,39,220 रुपये का कैश और करीब 58 लाख रुपये की अन्य सामग्री बरामद हुई…
टीनू यादव (चंपत राय के पर्सनल ड्राइवर): जो पहले ऑटो चलाता था, उसके घर से 50 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी के कागज, एयरपोर्ट के पास 70 कमरों का हॉस्टल, कई रेस्टोरेंट्स में हिस्सेदारी और फॉर्च्यूनर कार बरामद हुई…
लवकुश मिश्रा व अन्य: पहले कार मैकेनिक रहे लवकुश के घर गोबर के ढेर से 10 लाख रुपये कैश मिले, वहीं आरोपी 25-25 लाख के आलीशान मकान और फार्महाउस बना रहे थे…
अभी तक इसी मामले की जांच कर रही थी SIT और आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने कर दिया बड़ा खुलासा
करोड़ों का लैंड स्कैम (जमीन घोटाला)
आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने एसआईटी को मंदिर से जुड़े 11 भूमि दस्तावेजों (Land Deals) को सौंपकर इस घोटाले में एक और बड़ा खुलासा किया है…
आरोप है कि एक बीजेपी विधायक ने एक पंडित से 20 लाख रुपये में जमीन खरीदकर महज कुछ समय बाद उसे ढाई करोड़ रुपये में ट्रस्ट को बेच दिया…एक अन्य सौदे में, दो व्यक्तियों ने 2 करोड़ रुपये में जमीन खरीदी और उसके महज 10 मिनट बाद उसी जमीन को ट्रस्ट ने 18.5 करोड़ रुपये में खरीद लिया…
एक पति और पत्नी से भी जमीन खरीदी गई जबकि इन दोनों को ही कोर्ट ने तड़ीपार कर रखा था बावजूद ट्रस्ट के लोग उनके पास गए, और उनसे जमीन खरीदी… उसे जमीन को भी जीतने में खरीदा गया उससे दोगुनी टाइनी धाम पर फिर ट्रस्ट को भेज दिया गया…
इसके अलावा, मंदिर निर्माण के दौरान 40% तक कमीशन लेने और श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए सोने-चांदी के गहनों को रिकॉर्ड में दर्ज करने से पहले ही गायब करने के भी गंभीर आरोप लगे हैं… इसके साथ ही सिंधी समाज से जुड़े कुछ लोगों ने भी कई 100 किलो चांदी की ईंटें ट्रस्ट को दान की सामने आया है कि ट्रस्ट ने उन ईटों की रसीद भी सिंधी समाज को नहीं दी इसके साथ ही मुंबई के एक व्यापारी ने भी कई किलो चांदी दान किया और उनके अनुसार भी उन्हें भी उसकी रसीद नहीं दी गई…
ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में आक्रोश है। विपक्ष और मंदिर आंदोलन से जुड़े कई वरिष्ठ नेताओं का आरोप है कि इस घोटाले के पीछे ट्रस्ट के बड़े और रसूखदार नाम शामिल हैं… हालांकि, अभी पुलिस ने अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और मनीष यादव समेत 8 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया है…
सवाल यह भी उठ रहा है कि साल 2020 और 2025 में ऑडिट फर्मों द्वारा इंटरनल लूपहोल्स और चोरी की चेतावनी देने के बावजूद समय रहते कड़े कदम क्यों नहीं उठाए गए और इन चेतावनियों को क्यों दबा दिया गया…
स्रोतों और विश्लेषकों का कहना है कि जब तक ट्रस्ट को पूरी तरह पारदर्शी नहीं बनाया जाता और जनता के पैसे का रियल-टाइम डैशबोर्ड व इंडिपेंडेंट ऑडिट सामने नहीं रखा जाता, तब तक ऐसे घोटालों पर लगाम लगाना मुश्किल होगा
