गुलदार का खूनी तांडव: शौच को गए व्यक्ति को नोचकर मार डाला।
मंगोली गांव का हादसा अभी तक लोग भूले भी नहीं कि, धरगड़ा में 27 दिन बाद फिर इंसानी शिकार; दहशत में गांव, प्रशासन-वन विभाग हाई अलर्ट पर।
लोहाघाट।
धरगड़ा गांव की सुबह चीख-पुकार में तब बदल गई जब शौच के लिए निकले देव सिंह अधिकारी (42 वर्ष) को गुलदार ने घात लगाकर मौत के घाट उतार दिया। गर्दन पर वार करते ही व्यक्ति की मौके पर ही तड़पकर जान चली गई। पिछले 27 दिन में दूसरा हमला होने से ग्रामीणों में आक्रोश और दहशत चरम पर है। मंगोली की त्रासदी का जख्म अभी भरा भी नहीं था कि गुलदार ने एक और घर को उजाड़ दिया। घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी मनीष कुमार टीम सहित मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों की परेशानी देखते हुए उन्होंने तुरंत आदेश देकर समीप आयुर्वेदिक चिकित्सालय में ही पोस्टमार्टम करवाया।
डॉ. मंजित सिंह की टीम ने प्रक्रिया पूरी कर शव परिजनों को सौंपा। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने गुलदार को मार गिराने की मांग उठाई। डीएम ने इस मांग को वन विभाग के शीर्ष अधिकारियों तक पहुंचाने और गांव को हर स्तर पर सुरक्षा देने का भरोसा दिया।
घटना के तुरंत बाद एसीएफ सुनील कुमार, काली कुमाऊं व लोहाघाट रेंज के अधिकारी मौके पर जुट गए। कुछ देर बाद चंपावत वन प्रभाग का अतिरिक्त कार्यभार देख रहे डीएफओ आशुतोष सिंह भी मौके पर पहुंचे।
उन्होंने पीड़ित परिवार को विभाग की ओर से ₹6 लाख का मुआवजा चेक सौंपा और क्षेत्र में व्यापक ऑपरेशन शुरू कर दिया। वन विभाग ने क्षेत्र में 4 स्टील पिंजरे, 1 ड्रोन, लगभग 2 दर्जन ट्रैप कैमरे, तेज पेट्रोलिंग डीएफओ ने साफ कहा “हमलावर गुलदार नरभक्षी बन चुका है, इसलिए कुछ दिन यही आसपास मंडराने की पूरी आशंका है। किसी भी हालत में अकेले जंगल न जाएं।” मुख्यमंत्री की ओर से संवेदना व्यक्त करते हुए भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सतिश चन्द्र पांडे ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की।
जिला पंचायत सदस्य योगेश जोशी लगातार सुरक्षा प्रबंधन पर नजर बनाए हुए हैं और वन विभाग व प्रशासन के साथ तालमेल में हैं। घटना के बाद धरगड़ा गांव में भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों ने मांग की कि हमला करने वाले गुलदार को जल्द से जल्द ढूंढकर कार्रवाई की जाए, वरना ग्रामीण आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
